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वक्त आखिर किस तरह काटें
त्रिभुवन पांडे चुप रहें या बोलकर बाँटेंवक्त आखिर किस तरह काटेंकहें क्या? किससे कहें?कुछ कथ्य भी तो चाहिएबात में कुछ बातकोई तथ्य भी तो चाहिएरश्मि खोजें तिमिर को बाँटेंवक्त आखिर किस तरह काटेंनदी जैसे बहेंया छाँव बन जाएँ शहर जैसा अजनबीया गाँव बन जाएँ मुखौटे खोजें या चेहरे छाँटेंवक्त आखिर किस तरह काटेंगा रही थी शाख पर
एक चिड़िया कलगुम हुए जाने कहाँ वहछोड़ निष्प्रभ पलमौन,हतप्रभ शब्द की हाटेंवक्त आखिर किस तरह काटें।