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रेगिस्तान
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जितेंद्र चौहान रेगिस्तान तुम अच्छे हो खिले हुए फूलों से नीले आसमान सेगहरी झील से तुम किसी की कल्पना नहीं बनतेतुम किसी को सपने नहीं दिखाते सच तो यह है कि तुम जिंदगी कीजीती-जागती परिभाषा हो हमारे लिएहम तुमसे ही लेते हैंरोज जीने के लिए संजीवनी।