1. लाइफ स्‍टाइल
  2. »
  3. साहित्य
  4. »
  5. काव्य-संसार
Written By WD

रंग-बिरंगी भूलों के दिन

हरीश निगम

भूलों के दिन
NDND
तितली के दिन फूलों के दिन,
रंग-बिरंगी भूलों के दिन।

आँचल उड़े बजे हैं कंगन
टूट रहे हैं सारे बंधन।
भूले सभी उसूलों के दिन!
रंग-बिरंगी भूलों के दिन।

यूँ ही हँसे कभी मुस्कराए
आँखों में इन्द्रधनुष उग आए।
फिर सपनों के, झूलों के दिन!
रंग-बिरंगी भूलों के दिन।

कुछ खट्टी कुछ मीटी टीसें
बड़े दिनों में फली अशीषें
भाए आज बबूलों के दिन।
रंग-बिरंगी भूलों के दिन।
लेखक के बारे में
WD