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Written By स्मृति आदित्य

मन चाहता है

फाल्गुनी

फाल्गुनी
मेरा मन चाहता है
बस, तुम्हारा होना
और एक तुम हो कि
बस, मन से ही मेरे नहीं हुए।
यही तो अंतर है तुममें और मुझमें,
तुम मन रखते ही नहीं हो
और
मैं मन के सिवा कुछ रखती ही नहीं हूँ।