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Written By भारती पंडित

बिटिया की विदाई पर ....

पिता का पत्र

बिटिया की विदाई
NDND
मेरी नन्ही कली ,
अभी कल ही की तो बात है,

'छम' से आई थी घर में मेरे,
जीवन को नंदनवन बनाने,
तुतलाते शब्दों से

मेरे कानों को अमृतपान कराने,
अभी कल ही की तो बात है।

तेरी खिलखिलाहटें जो जगाती थी घर को,
तेरी अठखेलियाँ जो मोहती थी मन को,

तेरा रोना-हँसना, रूठना-मनाना,
मानो जीवित हो जाता था घर,
अभी कल ही की तो बात है।

बढ़ने लगी तू पुष्पलता सी,
रिश्तों के नए अर्थ सुवासित करती,

कभी दोस्तों सा अधिकार जताती,
कभी माँ-सी डाँट लगाती,

कभी बच्ची-सी मचल भी जाती,
अभी कल ही की तो बात है।

NDND
आज विदाई की इस बेला में,
तेरा पिता निस्तब्ध अकेला है,

ओठों पर है आशीषों की झड़ी,
आँखों में स्मृतियों का मेला है,

आज जो हुई पराई, रौनक थी मेरे घर की,
हाँ, अभी कल ही की तो बात है ।।
लेखक के बारे में
भारती पंडित