बिखर गया हूँ फ़साने की तरह
रोहित जैन ग़मों ने बाँट लिया मुझको ख़ज़ाने की तरहबिखर गया हूँ हर गली में फ़साने की तरहमुझे कुछ इस तरह से ढ़ूँढ़ रही है गर्दिशके जैसे मै हूँ शिकारी के निशाने की तरहके रात रात न हो, कोई चिता हो जैसेके जैसे ख़्वाब हों जलने के बहाने की तरहमै कोई संग न था मै तो एक शीशा थापटक दिया मुझे पत्थर पे ज़माने की तरहये वहम ये ख़लिश ये वफ़ा-मिजाज़ ज़ेहनइन्होंने कर दिया 'रोहित' को दीवाने की तरह।