प्यार के सतरंगी अर्थ
ज्योति जैन
प्रेम और प्रकृति दो खूबसूरत वरदान, जाना करीब से तो हुए इन्द्रधनुष अहसास, महसूस करें तो लगें बेहद खास। बैंगनी बरसों बाद खिलता है कैक्टस का बैंगनी फूल लगता है किसी रहस्य की तरह प्यार भी तो रहस्य ही है मिल जाए तो बस पल भर में ना मिले तो बरसों-बरस दुर्लभ जब खिले तो भूल जाए असँख्य काँटों के बीच बने रहने का सच। जामुनी जामुनी पंखों वाली नन्ही चिड़िया विरली होती है जैसे सच्चा प्यार, जब उड़ती सागर के विशाल ह्रदय पर तब नन्ही होकर भी अहसास कराती अपने विराट होने का। नीला आकाश और सागर सा नीला होता है प्यार भी दोनों का कोई छोर नहींअनंत, अपार, अथाह, जैसे एक-दूजे में समा जाने की चाह। हरा
उत्ताप दोपहरी में जलते पथ पर घने वृक्ष की ठंडी छाँह सा गहरा हरा है प्यार प्यार, जैसे दूर तक फैली वसुंधरा सुनहली। रिश्तों को देती मीठी भावनाएँ पहली-पहली। पीला प्यार है एक पीली नाजुक परों वाली तितली की तरह जो कोमलता से भी कोमलछोड़ जाती है दमकता पीला रंग साथी की गुलाबी हथेली पर। नारंगी सूरज का नारंगी गोला निकलता है जब नहाकर गहरे सागर से तब उसकी संतरी छटा फैलाती है धरा पर प्यार का उजला संदेश कहती है बस एक बात प्यार है खिली उजास आस और विश्वास। लाल प्यार का एक रंग लाल भी जो कहता है एक ही रंग है सबके लहू का फिर कैसा अंतर मानव से मानव का, बिना किसी भेदभाव जो हर तन में एक सा बहता है और प्यार का सुर्ख गुलाब भी, बस यही सबसे कहता है। रंगहीन प्यार, होता है रंगहीन, पारदर्शी भी मिले तो खुशी से छलक पड़ता है आँखों की राह से, रंगहीन अश्रु के रूप में किसी अपने की चाह में, और परावर्तित हो निखर उठता है फिर वही खिलते इन्द्रधनुष सा जैसे जाग उठा था सृष्टि पर कभी एक मनुज सा।