पोंछा लगाना
- सुरेश सेन निशांत
दत्त चित्तअपने आप में मगनतुम लगा रही हो पोंछा। खुशी में लहलहा रहा है घर का मननिखर उठा है आंगन का भी चेहरापंछियों की चहचहाहट मेंभर गया है नया रस।इस वक्त फर्श परगंदे पांव चलना मना हैयूं तुम रोकोगी सभी कोइस धरती पर भीगंदे पांव चलने से।धरती को सुंदर बनाने के लिएबहुत जरूरी है तुम्हारा इस तरह डांटनाकवियों को तुम्हीं से सीखना होगाधरती को सजाने का यह हुनर।