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पालने का गीत
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ग्रॅब्रिएला मिस्त्राल मेरी अपनी ही माँस-मज्जा का एक नन्हा टुकड़ागहरे तक मुझमें रचा-बसाइतना नन्हा कि भयभीत शीत सेमेरे नन्हे मुझसे चिपटकर सो तूभूँकते हुए कुत्तों से सावधानसोता है तीतर अपने कोटर मेंलेकिन नहीं करती आंदोलित तुझे मेरी साँसेंमुझसे चिपटकर सो तूजीवन के लिए भयभीतघास की काँपती हुई नन्ही धारमेरे स्तनों को अकेला न छोड़मुझसे चिपटकर सो तूमैं जो सबकुछ खो चुकी हूँनींद के ख़्याल से काँपने लगती हूँमेरी बाँहों में मत छिटकमुझसे चिपटकर सो तू।अनुवाद- नरेंद्र जैन (
पहल की पुस्तिका ‘पृथ्वी का बिंब’ से साभार)