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Written By WD

पागल युवती

- नंदकिशोर

हिन्दी कविता
FILE

लाज का पर्याय औरत
जब सड़कों पर
नंगी घूमती है
तब इसका मतलब उसके
मस्तिष्क का वह
विस्फोट है
जिसमें शर्म के हर शीशे
चकनाचूर होकर
ध्वस्त हो जाते हैं

नंगी औरत जब बाजार में
हंसती है
तब इसका अभिप्राय होता है
वह चली गई है
आदि मानव के इतिहास से भी पीछे
और खड़ी है
बंदरों से जरा ही आगे

वह काला हाथ कहां है
जिसने तोड़ दिया है शीशा
और फेंक दिया है
एक औरत को इतना पीछे?...
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