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पत्ता वह क्या करे

नन्दकिशोर आचार्य

कविता
ND
खिलाता है हरे पल्लव
सूखे पत्तों को लेकिन
गला देता है-
प्यार है
मृत्यु भी है जल
किसी के लिए

पत्ता वह क्या करे लेकिन
जो जल की कामना में
सूख जाता है।