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निराला की दो कविताएँ
* नयनों के डोरे लाल गुलाल-भरे खेली होलीजागी रात सेज प्रिय पति-संग रति सनेह-रंग घोलीमली मुख चुंबन रोलीप्रिय-कर-कठिन-उरोज-परस कस कसक मसक गई चोलीएक वसन रह गई मंद हंस, अधर-दशन, अनबोलीकली सी काँटे की तोलीमधु-ऋ तु रात, मधुर अधरों की पी मधु सुध-बुध खोलीखुले अलक, मुंद गए पलक दल, श्रम सुख की हद होलीबनी रति की छवि भोलीबीती रात सुखद बातों में प्रात पवन प्रिय डोलीउठी संभाल बाल, मुख लट पट, दीप बुझा, हँस बोली। * रही यह एक ठठोलीजला है जीवन यह जला है जीवन यह आतप में दीर्घ काल,सूखी भूमि, सूखे तरुसूखे सिक्त आलबाल,बंद हुआ गूँज, धूलधूसर हो गए कुंजकिंतु पड़ी व्योम-उरबंधु नील मेघ-माल।