Love Poem in Hindi | तुमसे जुड़ने के बाद...
फाल्गुनी
WD |
मैं नहीं जानती
मेरे अस्तित्व पर
कितना गहरा प्रभाव है तुम्हारा
पर जब भी मेरी अंगुलियों से
टकराती है तुम्हारी अंगुलियां
मेरी धमनियों में
बज उठता है कोमल सितार,
मेरी आंखों में
चमक उठता है
तुम्हारा गुलाबी प्यार,
दिल की कच्ची क्यारी में
महकती है रजनीगंधा
और मैं पीना चाहती हूं
हर उस सुगंध को
जो तुमसे उठकर
मेरे आसपास मचलती है।
मैं, मैं नहीं होती जब
तुम मेरे पास होते हो
और
मैं,
मैं तब भी नहीं होती
जब तुम दूर रहते हो।
मैं सच में नहीं जानती
कितना मीठा प्रभाव है तुम्हारा
मुझ पर,
लेकिन मैं जानती हूं
मेरे जीवन के हर स्वाद,
हर अहसास,
हर महक,
हर रंग
बदल गए हैं
तुमसे जुड़ने के बाद।
