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Written By WD

ताल भर सूरज

साहित्य
शलभ श्रीराम सिंह
NDND

ताल भर सूरज -

बहुत दिन के बाद देखा आज हमने

और चुपके से उठा लाए--

जाल भर सूरज!

दृष्टियों में बिंब भर आकाश -

छाती से लगाए -

घाट

घास

पलाश!

तट पर खड़ी बेला

निर्वसन

चुपचाप

हाथों से झुकाए-

डाल भर सूरज!

ताल भर सूरज...!

साभार : वागर्थ