1. लाइफ स्‍टाइल
  2. »
  3. साहित्य
  4. »
  5. काव्य-संसार
  6. घोंसला
Written By WD

घोंसला

- पंकज त्रिवेदी

कविता
ND
चिड़िया को
घोंसला बनाते हुए
देख रहा हूँ मैं
आजकल
एक-एक धागे और तीलियों से
अपना घोंसला बनाने को
मथती रहती हैं हरदम,
हर पल पुरुषार्थ में
डूबी सी...
आनेवाली खुशियों की
ND
भनक लगी हैं उन्हें और
उसकी मेहनत रंग लाती हैं...
दिन बीतता हैं और घोंसला
बनता जाता हैं....
भूचाल के बाद -
मैंने भी बड़ी कोशिश की थी...
अब, चिड़िया को देखकर
सुकून मिलता हैं मुझे और भी ज्यादा...!!!