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Written By WD

क्या बात है?

- रोहित जैन

क्या बात है
ND


तुम इश्क को मेरे परखते हो? क्या बात है?
सागर को सीपियों से उलचते हो? क्या बात है?

जब जानते हो खून तो ताजा ही आएगा
तुम जख्म को अपने खुरचते हो? क्या बात है?

महकते थे, बहकते थे, मचलते थे, संभलते थे
सिसकते हो, सुबकते हो? क्या बात है?

वो बेवफा था, और ये कह भी गया कमबख्त वो
तुम उसी की राह तकते हो? क्या बात है?

एक ही मुश्किल है कि मुश्किल बहुत है भूलना
पर याद तुम दिन-रात करते हो? क्या बात है?

जिस मोड़ से रहने की दूर तुम कसम खा आए थे
उस मोड़ पर अब भी ठहरते हो? क्या बात है?

एक जमाने में जिन्हें तुम्हीं ने समझाया था इश्क़
इश्क़ अब उनसे समझते हो? क्या बात है?

आँख की गहराइयों में, दिल के अंधियारों के बीच
यूँ शमा बनकर पिघलते हो? क्या बात है?

दिल गया तो आँख को कैसा दिया है काम ये
बस वही तस्वीर तकते हो? क्या बात है?

तुमने ‘रोहित’ से कहा था इश्क गम का नाम है
बात से अपनी पलटते हो? क्या बात है?