क्या अब भी सोते रहोगे...?
दिगंबर नासवा
इतिहास के क्रूर पन्नों पर समय तो दर्ज करेगाहर गुजरता लम्हामुंह पर उगे मुंहासों से लेकरदिल की गहराइयों में छिपी क्रांति कोखोल के रख देगा निर्विकार आईने की तरहअनगिनत सवाल रोकेंगे रास्तातेरी मेरीहम सबकी भूमिका पर जो तटस्थ रहेंगेया लड़ेंगेसमय तो लिखेगाउन सबका इतिहास क्या सामना करोगे इन सवालों कासृष्टि के रहने तकयुग के बदलने तकभविष्य में उठने वालेइन प्रश्नों का जवाब वर्तमान में ही देना होगा क्या अब भी सोते रहोगे...?