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Written By WD

कुछ नहीं बोलता है पेड़

नन्दकिशोर आचार्य

कविता
ND
खिलता है हर लम्हा
तुम-सा
मुर्झा कर झर जाता
मुझ-जैसा

कुछ नहीं बोलता है
पेड़
महकाता रहता केवल
झर गए फूल की खुशबू
खिलते फूल में
चुपचाप!
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WD