1. लाइफ स्‍टाइल
  2. »
  3. साहित्य
  4. »
  5. काव्य-संसार
Written By WD

कितना अच्छा होता है

-सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
ND
कितना अच्छा होता है
एक-दूसरे को बिना जाने
पास-पास होना
और उस संगीत को सुनना
जो धमनियों में बजता है,
उन रंगों में नहा जाना
जो बहुत गहरे चढ़ते-उतरते हैं।


शब्दों की खोज शुरू होते ही
हम एक-दूसरे को खोने लगते हैं
और उनके पक़ड़ में आते ही
एक-दूसरे के हाथों से
मछली की तरह फिसल जाते हैं।

हर जानकारी में बहुत गहरे
ऊब का पतला धागा छिपा होता है,
कुछ भी ठीक से जान लेना
खुद से दुश्मनी ठान लेना है।

कितना अच्छा होता है
एक-दूसरे के पास बैठ खुद को टटोलना,
और अपने ही भीतर
दूसरे को पा लेना।
लेखक के बारे में
WD