1. लाइफ स्‍टाइल
  2. »
  3. साहित्य
  4. »
  5. काव्य-संसार
  6. एक ही काफी है
Written By WD

एक ही काफी है

स्त्री
पंकज चतुर्वेदी
ND
ND
यहाँ एक स्त्री है
जो किसी और ही
दुनिया में रहती है
यह उसके स्वप्न की
दुनिया नहीं

फिलहाल उसका सपना टूटता है
उसके बच्चे के
रोने और किलकने से
वह निशानी है प्यार की
जो उस स्त्री और
उसके पति के बीच हुआ था
और नहीं भी हुआ था

पहले वह दो बच्चे चाहती थी
शायद इसलिए
कि खुशी दोगुनी हो जाए
प्यार दोगुना होकर मिले
या इस अज्ञात भय से
कि एक बच्चा कहीं खो जाए
तो दूसरे से आँसू थम सकें

मगर वह पहले बच्चे के
लालन-पालन की मुश्किलों से
इतनी आहत और पस्त है
कि अब वह कहती है :
एक ही काफी है
अगरचे इस एक को वह
दिलोजान से चाहती है
इतनी उत्कंठा और संसक्ति से
गोया यह उस प्यार का विकल्प है
जो वह अब तक नहीं कर पाई

उसे देखकर लगता है
गोया सचमुच
'एक ही काफी है।'