सिर्फ, एक छोटा-सा पल तुम्हें लेकर आया मुझ तक, और जैसे मैंने जी लिया एक पूरा युग। उस एक संक्षिप्त पल में गुजरी मुझ पर एक साथ भीनी हवाओं की नरम थपकियाँ बरसीं मीठी शीतल सावन बूँदें बिखरी कच्ची टेसू पत्तियाँ कानों में घुलती रही देर तक तुम्हारी नीम गहरी आवाज मेरी आँखों में चमकती रहीं तुम्हारी शहदीया दो आँख मेरी अँगुलियों में महकता रहा तुम्हारे जाने का अहसास दिल की गुलमोहर बगिया में खिली देर तक एक सुहानी आस। सामने थे तब कितनी दूर थे तुम अब जब कहीं नहीं हो तब कितने आसपास....बनकर खास! एक मधुरिम प्यास..!