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Written By WD

उसके लिए

उसके लिए ग्रॅब्रिएला मिस्त्राल
- ग्रॅब्रिएला मिस्त्राल
ND

उसकी खातिर, उसके लिए
अब जो लोरी से सो गया
घास में पानी के धागे की तरह जो
मुझे मत छेड़ो, करने के लिए मुझे कोई
काम न दो मेरी हर बात को मुआफ करो
मेज़ जैसे रखी है उससे मुझे चिढ़ है और
शोर के प्रति मेरी जुगुप्सा

तुम कह सकते हो मुझसे
घर की दिक्कतों के बारे में
घर की दुश्चिंताएँ, उसके कार्य-कलाप
तब जबकि मैंने बच्चे को
ढाँपकर रख दिया हो

मेरे मस्तक पर, मेरे वक्ष पर
जहाँ कहीं तुम मुझे छुओ
वहाँ वह है,
और वह कुनमुनाएगा यदि
दोगे मुझे तुम तकलीफ

अनुवाद- नरेंद्र जैन
(पहल की पुस्तिका ‘पृथ्वी का बिंब’ से साभार)