Poem | ईद का एक चाँद था
दीपाली पाटील
आँखें नम रही
और सारी दुआएँ उसके नाम कर दीं
हर सहर इबादत की
अपनी उम्र
उसके नाम कर दीं
कुछ आँसू थे और
ईद का एक चाँद था
मेरे मौला की झोली में
अपने लिए बारिशें रख लीं
और चाँद वाली रात
उसके नाम कर दीं।
और सारी दुआएँ उसके नाम कर दीं
हर सहर इबादत की
अपनी उम्र
उसके नाम कर दीं
कुछ आँसू थे और
ईद का एक चाँद था
मेरे मौला की झोली में
अपने लिए बारिशें रख लीं
और चाँद वाली रात
उसके नाम कर दीं।
