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आगमन नए साल का
सीमा सिंघल पल-पल वक्त के साथ कदम मिला के चल,ठहरता नहीं यहाँ किसी के लिए कोई भी पल।बीते वक्त की बातों से सीख लेना सदा ही,जाने वाला लम्हा लौटेगा नहीं, वो होगा कल।नया पल, नया दिन, लेकर आ रहा है ये साल नया, मुस्करा के जरा इसका स्वागत करें चल।भूल के गिला-शिकवा दोस्तों से मिल के बाँटो खुशी, मुबारक हो साल नया दो दुआ इस पल।आएँगी बहारें खुद चमन में मुस्कराते हुए मिलोगे,महकेगा आँगन फूलों की खुश्बू से तेरा हर पल।वादा करें तो तोड़े नहीं, अपनों को साथ ले हम,उम्मीद का दामन सीमा' छूटे न किसी भी पल।आगमन नए साल का, विदा करना हर साल, एक नए साल को, फिर सजाना आने वाला कल।