आओ दीप जलाकर खुशियाँ मना लें
यास्मीन हुसैन 'कवँल'
आओ दीप जलाकर खुशियाँ मना लें। घर-आँगन को खुशनुमा बना लें॥अपना घर ही दोस्तों क्यों जगमगाएँ। आओ उस निर्धन का भी घर सजा दें॥देश को एकता का पाठ पढ़ा दें। पुराने दौर सा साहस दिखा दें॥जैसे एक होकर अँगरेजों को भगाया। आओ मिलकर देश-द्रोही मिटा दें॥पलट कर रख दें वो सत्ता जो लड़ाएँ। दीपावली में ऐसे हर रावण को मिटा दें॥जगमग-जगमग है शाम बहुत गजब है।आओ मीठी आवाज में प्यारा गीत सुना दें॥ये हरियाली सब के लिए है! ये दीपावली सब के लिए है। ये संदेश जन-जन तक पहुँचा दें॥हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई आपस में भाई-भाई। आओ मिल कर भ्रष्टाचार मिटा दें॥दीप से दीप जला कर राम कसम कहते हैं।प्रेम और शांति का पैगाम देंगे।खुशियों के हर घर दीप जला देंगे। चारों ओर का अँधेरा मिटा देंगे॥मिटा देंगे हम भ्रष्ट नेतागिरी।महात्मा गाँधी की सीख सिखा देंगे॥कोई बाग-बगीचा हमको न मिले न सही।ईश्वर-अल्लाह कीचड़ में भी 'कवँल' खिला देंगे॥