आओ खेलें कुछ इस तरह होली
शोभना चौरे
|
'महुआ' नहीं है तो क्या?
मै हूँ ,हम है, आप है
'पलाश नहीं है तो क्या ?
पिचकारी है, लड़कपन है ,शरारत है
रंग नही है तो क्या?
रात की रानी है ,
'पानी' नही है तो क्या?
पास है अपने सभी तो
निराशा की क्या बात है,
आओ
लड़कपन की शरारत को
याद करके,
मस्ती भरी पिचकारी को याद कर के,
रात की रानी और गुलाब की महक से
सारा जहाँ अपना बना ले,
आप, हम और मैं
अबके बरस इस होली में,
गुलाब की बहार है,
रंगों की टोलियाँ नहीं है तो क्या।

