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आँसू...
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आयुष त्रिवेदी कुछ बेशर्म से, बेधड़क से, बेपरवाह से... , निकल आते हैं ये आँसू, नाक गुदगुदाकर, आँखें भरकर, निकल आते हैं ये आँसू... कभी दुख तो कभी खुशी में, कभी भीड़ तो कभी तनहाई में, पलकों के किनारे से, गालों के सहारे से, आँखें डबडबाकर, निकल आते हैं ये आँसू.... कभी बात-बात में तो कभी जज्बात में, कभी फिजूल हैं तो कभी जरूरी, कभी दिल को हल्का करते, तो कभी रिश्तों को रूमानी,कभी किसी को आता देख, तो कभी किसी को जाता, कुछ बेशर्म से, बेधड़क से, बेपरवाह से, निकल आते हैं ये आँसू...