sundarkand
✕

श्रीराम पर कविता : हे राम, रोम-रोम में रमण तुम्हीं, गति का नाम तुम्हीं

Updated: बुधवार, 21 अप्रैल 2021 (13:25 IST)
रमंति इति रामः!
हे अजेय !
हो दुर्जेय !
मम जीवन मंत्र तुम्हीं
रोम-रोम में रमण तुम्हीं
गति का नाम तुम्हीं
सतत प्रवाहित 
एक नाम तुम्हीं !
हे शिव आराधक
त्रिगुण स्वामी के
हृदय मध्य बैठे साधक
ठहराव व बिखराव
भ्रम और भटकाव
माया,मद व मोह 
शांत कर स्वतः
विश्रांति के संस्थापक
हे राघव
तेरे नाम से मनुज
होता भवसागर पार
विष्णु के अंशावतार
यत्र,तत्र हो
ब्रह्मांड में सर्वत्र हो
कण-कण में हो
रज,वायु,जल,अग्नि
भूमि और आकाश में हो 
तुम्हीं वृत्त की आवृत्ति
तुम्हें जपूं ये मेरी 
है जन्मजात प्रवृत्ति
हे निर्गुण के राम
करो दूर सारी विपदा
जन साधारण में
में बसे दुर्गुण आम
हे महाऊर्जा के
मेरे अनंत स्त्रोत
करूँ मुख से मंत्रोच्चार
पूजूँ, जलाऊँ अखंड जोत 
करूँ जगत संताप
शुचि कुंड के अग्निहोत्र !!
 
स्वयं मैं ही -
डॉ.अंजना चक्रपाणि मिश्र
लेखक के बारे में
डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र
स्वतंत्र लेखिका, संगीत, काव्य और साहित्य में अभिरुचि.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

वाणी साहित्य उत्सव का आगाज, पहले दिन युद्ध, स्त्री विमर्श और एआई के दौर में लेखन पर हुआ मंथन

वर्ल्ड स्ट्रोक डे: स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही लें चिकित्सकीय सहायता, हर मिनट है कीमती

बौखलाए नेताओं की बेरहमी का ये सबसे निर्दयी उदाहरण है, 200 पेड़ों से हजारों परिंदों के आशियाने उजाड़कर मेट्रो चलाएंगे

करवा चौथ से पहले चेहरे पर कैसे लाएं नेचुरल ग्लो? घर पर अपनाएं ये आसान ब्यूटी टिप्स

विजय सिंह चौहान की आठ लघुकथाएं

अगला लेख