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Written By शम्भू नाथ

देवी सरस्वती पर कविता : हे अम्बु वीणा हाथ ले।

Goddess Saraswati Poems
हे अम्बु वीणा हाथ ले।  
फिर एक बार बजाय दे।
 

 
 
 
ज्ञान का भंडार भर मां।  
अंधकार भगाय दे।।
हे अम्बु वीणा हाथ ले।  
फिर एक बार बजाय दे।
 
मृदुवाणी का बोल हो।  
शब्दों का माते जोड़ हो।  
भक्त अर्चना कर रहा है।  
जीवन की ज्योति जलाय दे। 
हे अम्बु वीणा हाथ ले।  
फिर एक बार बजाय दे। 
 
लेखनी में निखार आये।  
खुशियों की बहार आये।  
मेरे लिखे हुए शब्दों में मां।  
हमेशा ही प्रकाश आये।  
सारे बिगड़े काम अम्बे।  
मेरा अब बनाय दे।  
हे अम्बु वीणा हाथ ले।  
फिर एक बार बजाय दे। 

 
लेखक के बारे में
शम्भू नाथ