हिन्दी को सरल रहने दीजिए

FILE


हिन्दी माध्यम के सारे स्कूलों को बंद कर दिया है या उन्हें म्यूनिसिपल स्कूलों जैसा दोयम दर्जा दे दिया है और उसके बाद हम अपेक्षा करते हैं कि हमारे बच्चे दसवीं कक्षा में ही हिन्दी का समृद्ध साहित्य पढ़ें और यह समृद्धि जाहिर है या तो भक्तिकाल में हैं या छायावाद में (जिस छायावाद को कोई दलित प्राध्यापक उसकी क्लिष्ट भाषा और सौंदर्यवादी कलापक्ष के कारण हिन्दी साहित्य का कलंक कह देता है तो सेमिनार में सिर फुटौवल की नौबत आ जाती है।)

सुधा अरोड़ा|
हमें फॉलो करें
हमने खुद ही तो अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाया है, बोलना सीखते ही ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टार और जॉनी जॉनी यस पपा कविताएं रटवाई हैं। हिन्दी का क ख ग पढ़ाना तो दूसरी कक्षा से ही शुरू किया है।



और भी पढ़ें :