इंटरनेट पर कैसी है हिन्दी की स्थिति?

Author स्मृति आदित्य|
बहरहाल, बहस की अनिवार्यता यह है कि हम और हिन्दी, या कहें हिन्दी और हइस रिश्ते की गरिमा की पड़ताल का वक्त आ गया है। 14 सितंबर को हम सबको हिन्दी की ऐसी याद आती है जैसे आज अगर उसके लिए आवाज न उठाई गई तो भाषा विलुप्त हो जाएगी। श्याम रुद्र जैसे साहसी विद्वान किसी 14 सितंबर की प्रतीक्षा नहीं करते। > >
 
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विडंबना देखिए कि एक तरफ श्यामरुद्र जैसे लोग लंबे समय के बाद मीडिया का ध्यान आकर्षित कर पाते हैं, दूसरी तरफ रेडीफ डॉट कॉम के सीईओ अजीत बालाकृष्णन फरमाते हैं पिछले दस सालों के इंटरनेट यूजर के आंकड़ों को प्रमाण मानकर कहा जा सकता है कि यूजर भारतीय भाषाओं को नहीं चाहते। जबकि वहीं हॉ. गणेश देवी जैसे विद्वानों का कहना है कि आम और तमाम धारणाओं के विपरीत हिन्दी का वर्चस्व प्रशंसनीय होकर बढ़ रहा है।
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