इंटरनेट पर कैसी है हिन्दी की स्थिति?

Author स्मृति आदित्य|
भाषायी गौरव के लिए इस देश में कई विद्वानों ने लंबी लड़ाई लड़ी है और श्यामरुद्र पाठक जैसे भाषा सेनानी आज भी अपनी भाषा के लिए जेल जाना पसंद करते हैं। श्याम रुद्र जैसे प्रखर विद्वान और भाषायी क्रांतिकारी कौन है यह प्रश्न हिन्दी प्रेमियों को शोभा नहीं देता। >
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फिर भी संक्षेप में बता दें कि अपनी भाषा के बुनियादी अधिकार के लिए ऐतिहासिक और अभूतपूर्व लड़ाई लड़ने वाले श्यामरूद्र पाठक गलत, झूठे, मनगढंत आरोप लगा कर तिहाड़ जेल भेजे गए, वहां सामान्य अपराधियों के साथ रखकर उन्हें शारीरिक और मानसिक यंत्रणा दी गई और पिछली 24 जुलाई को उन्हें अदालत में पेश किया गया।

उनके पक्ष में भारतीय भाषा आंदोलनकारियों ने 24 जुलाई को ही चले आ रहे अखण्ड धरने में ज्ञापन दे कर तत्कालीन प्रधानमंत्री से पूछा कि भारत को अंग्रेजी का गुलाम क्यों बनाया गया है और कब तक बनाया जाएगा? क्या यह देश के स्वाभिमान, आजादी व लोकशाही का गला घोंटना नहीं है?
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