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सेज पर साधें बिछा लो,
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नीरज सेज पर साधें बिछा लो,आँख में सपने सजा लोप्यार का मौसम शुभे! हर रोज़ तो आता नहीं है।यह हवा यह रात, यह एकाँत, यह रिमझिम घटाएँ,यूँ बरसती हैं कि पंडित-मौलवी पथ भूल जाएँ,बिजलियों से माँग भर लोबादलों से संधि कर लोउम्र-भर आकाश में पानी ठहर पाता नहीं है।प्यार का मौसम...दूध-सी साड़ी पहन तुमसामने ऐसे खड़ी हो,जिल्द में साकेत कीकामायनी जैसे मढ़ी हो,लाज का वल्कल उतारोप्यार का कँगन उजारो,'
कनुप्रिया' पढ़ता न वह 'गीतांजलि' गाता नहीं है।प्यार का मौसम...हो गए स दिन हवन तबरात यह आई मिलन कीउम्र कर डाली धुआँ जबतब उठी डोली जलन की,मत लजाओ पास आओख़ुशबूओं में डूब जाओ,कौन है चढ़ती उमर जो केश गुथवाता नहीं है।प्यार का मौसम...है अमर वह क्षण कि जिस क्षणध्यान सब जतकर भुवन का,मन सुने संवाद तन का,तन करे अनुवाद मन का,चाँदनी का फाग खेलो,गोद में सब आग ले लो,रोज़ ही मेहमान घर का द्वार खटकाता नहीं है।प्यार का मौसम...वक़्त तो उस चोर नौकर कीतरह से है सयाना,जो मचाता शोर ख़ुद हीलूट कर घर का ख़ज़ाना,व़क्त पर पहरा बिठाओरात जागो औ' जगाओ,प्यार सो जाता जहाँ भगवान सो जाता वहीं है।प्यार का मौसम...