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Written By WD Feature Desk
Last Updated : सोमवार, 25 अगस्त 2025 (17:15 IST)

क्यों उपहार में नहीं देनी चाहिए गणेश जी की मूर्ति?

ganesh ji gift me dena chahiye ya nahi
gifting ganesha idol is good or bad: सनातन धर्म में मूर्ति पूजा का बहुत महत्व है। लोग अपने घरों में देवी-देवताओं की मूर्तियां रखते हैं और उनकी पूजा करते हैं। हर मूर्ति की एक खास ऊर्जा और महत्व होता है। इसी तरह, गणेश जी की मूर्ति को भी बहुत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। वह विद्या, बुद्धि और सौभाग्य के देवता हैं, जो सभी विघ्नों को दूर करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गणेश जी की मूर्ति किसी को उपहार में देना क्यों सही नहीं माना जाता? इसके पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण हैं, जिनके बारे में जानना जरूरी है।

1. आध्यात्मिक ऊर्जा का आदान-प्रदान
ज्योतिष और वास्तुशास्त्र के अनुसार, किसी भी देवी-देवता की मूर्ति को अपने घर में स्थापित करने से उस घर में एक विशेष ऊर्जा का संचार होता है। जब आप गणेश जी की मूर्ति खरीदते हैं, तो आप उसे अपने घर की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए लाते हैं। यदि आप इस मूर्ति को किसी और को उपहार में दे देते हैं, तो ऐसा माना जाता है कि आप अपनी ऊर्जा और अपनी समृद्धि को भी उनके साथ साझा कर रहे हैं। ऐसा करना आपके लिए शुभ नहीं माना जाता।

2. विद्या और बुद्धि का प्रतीक
गणेश जी को विद्या और बुद्धि का देवता कहा जाता है। वह ज्ञान और विवेक का प्रतीक हैं। जब आप किसी को उनकी मूर्ति उपहार में देते हैं, तो यह माना जाता है कि आप अपना ज्ञान और बुद्धि किसी और को सौंप रहे हैं। यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक विचार है, लेकिन इसका गहरा आध्यात्मिक महत्व है। इस तरह के उपहार से आपके जीवन में बुद्धि और ज्ञान की कमी हो सकती है।

3. मूर्ति स्थापित करने के नियम
हर देवी-देवता की मूर्ति को स्थापित करने के कुछ खास नियम होते हैं। गणेश जी की मूर्ति को घर में रखने से पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि उनकी सूंड किस दिशा में हो। गणेश जी की सूंड बाईं ओर होने पर वह ज्यादा शुभ माने जाते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि वह घर में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं। यदि आप किसी को मूर्ति उपहार में देते हैं, तो आप इस बात से अनजान हो सकते हैं कि वे इसे सही तरीके से स्थापित करेंगे या नहीं।

4. भगवान उपहार की वस्तु नहीं होते
धर्मग्रंथों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि भगवान किसी वस्तु की तरह नहीं होते, जिन्हें उपहार के रूप में दिया जा सके। भगवान की मूर्ति को उपहार में देना एक तरह से उनका अनादर है। भगवान की मूर्ति को खरीदने या स्थापित करने का निर्णय व्यक्ति को खुद लेना चाहिए। यह एक व्यक्तिगत और आध्यात्मिक निर्णय है, जिसे किसी और पर थोपा नहीं जाना चाहिए।

इसके बजाय आप गणेश जी से जुड़ी अन्य चीजें जैसे उनकी तस्वीर, किताबें या फिर उनके प्रतीक के रूप में कोई कलाकृति उपहार में दे सकते हैं। यदि आप किसी को भगवान की मूर्ति ही देना चाहते हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि वे इसे सच्चे मन से स्वीकार करें और इसकी पूरी श्रद्धा से देखभाल कर सकें।

कुल मिलाकर, गणेश जी की मूर्ति को उपहार में देने से बचना चाहिए। यह एक आध्यात्मिक परंपरा है जो हमें बताती है कि कुछ चीजें बहुत निजी और पवित्र होती हैं, जिन्हें साझा करना या उपहार में देना सही नहीं होता।

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