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Written By WD Feature Desk
Last Updated : मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 (12:15 IST)

विजया एकादशी व्रत कथा Vijaya Ekadashi Vrat Katha

भगवान श्री विष्णु के पूजन की मनमोहक फोटो
Vijaya Ekadashi Katha In Hindi : फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी विजया एकादशी का व्रत हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है और इसे प्रत्येक वर्ष पद्मपुराण में वर्णित तिथियों के अनुसार मनाया जाता है। विजया एकादशी का व्रत उन भक्तों द्वारा रखा जाता है जो विजय प्राप्ति की कामना करते हैं और अपने जीवन में आने वाली समस्याओं से मुक्ति प्राप्त करना चाहते हैं। ALSO READ: विजया एकादशी 2026: 13 फरवरी को रखा जाएगा व्रत, जानिए तिथि, महत्व और नियम
 

यहां पढ़ें विजया एकादशी व्रत की पौराणिक कथा... 

कथा

विजया एकादशी की कथा के अनुसार त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी को जब 14 वर्ष का वनवास हो गया, तब वे श्री लक्ष्मण तथा सीता जी सहित पंचवटी में निवास करने लगे। वहां पर दुष्ट रावण ने जब सीता जी का हरण किया, तब इस समाचार से श्री रामचंद्र जी तथा लक्ष्मण अत्यंत व्याकुल हुए और सीता जी की खोज में चल दिए। घूमते-घूमते जब वे मरणासन्न जटायु के पास पहुंचे, तो जटायु उन्हें सीता जी का वृत्तांत सुनाकर स्वर्गलोक चला गया। 
 
कुछ आगे जाकर उनकी सुग्रीव से मित्रता हुई और बाली का वध किया। हनुमान जी ने लंका में जाकर सीता जी का पता लगाया और उनसे श्री रामचंद्र जी और सुग्रीव की मित्रता का वर्णन किया। वहां से लौटकर हनुमान जी ने भगवान राम के पास आकर सब समाचार कहे। श्री रामचंद्र जी ने वानर सेना सहित सुग्रीव की सम्पत्ति से लंका को प्रस्थान किया। 
 
जब श्री रामचंद्र जी समुद्र से किनारे पहुंचे तब उन्होंने मगरमच्छ आदि से युक्त उस अगाध समुद्र को देखकर लक्ष्मण जी से कहा कि इस समुद्र को हम किस प्रकार से पार करेंगे। श्री लक्ष्मण ने कहा- हे पुराण पुरुषोत्तम, आप आदिपुरुष हैं, सब कुछ जानते हैं। यहां से आधा योजन दूर पर कुमारी द्वीप में वकदालभ्य नाम के मुनि रहते हैं। उन्होंने अनेक ब्रह्मा देखे हैं, आप उनके पास जाकर इसका उपाय पूछिए।
 
लक्ष्मण जी के इस प्रकार के वचन सुनकर श्री रामचंद्र जी वकदालभ्य ऋषि के पास गए और उनको प्रमाण करके बैठ गए। मुनि ने भी उनको मनुष्य रूप धारण किए हुए पुराण पुरुषोत्तम समझकर उनसे पूछा कि हे राम! आपका आना कैसे हुआ? 
 
रामचंद्र जी कहने लगे कि- हे ऋषे! मैं अपनी सेना सहित यहां आया हूं और राक्षसों को जीतने के लिए लंका जा रहा हूं। आप कृपा करके समुद्र पार करने का कोई उपाय बतलाइए। मैं इसी कारण आपके पास आया हूं। 
 
वकदालभ्य ऋषि बोले कि- हे राम! फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का उत्तम व्रत करने से निश्चय ही आपकी विजय होगी, साथ ही आप समुद्र भी अवश्य पार कर लेंगे। हे राम! यदि तुम भी इस व्रत को सेनापतियों सहित करोगे तो तुम्हारी विजय अवश्य होगी। अत: जो कोई मनुष्य विधिपूर्वक इस व्रत को करेगा, दोनों लोकों में उसकी अवश्य विजय होती है 
 
इस तरह रामचंद्र जी ने ऋषि के कथनानुसार इस व्रत को किया और इसके प्रभाव से दैत्यों पर विजय पाई। श्री ब्रह्मा जी ने नारद जी से कहा था कि हे पुत्र! जो कोई इस व्रत के महात्म्य को पढ़ता या सुनता है, उसको वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

विजया एकादशी- FAQs

 
Q. विजया एकादशी कब आती है?
A. विजया एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। यह आमतौर पर फरवरी–मार्च के बीच पड़ती है।
 
Q. विजया एकादशी किस भगवान को समर्पित है?
A. यह व्रत भगवान श्री विष्णु को समर्पित है। इस दिन विशेष रूप से विष्णु जी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है।
 
Q. विजया एकादशी का क्या महत्व है?
A. मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को जीवन में विजय, सफलता और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान राम ने भी लंका विजय से पूर्व यह व्रत किया था।
 
Q. विजया एकादशी व्रत कथा क्या है?
A. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले यह व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें सफलता मिली। इसलिए इसे विजय प्रदान करने वाली एकादशी कहा जाता है।ALSO READ: जया और विजया एकादशी में क्या है अंतर जानिए

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Raajshri Kasliwal