दिवाली की रात, नहीं रहता है भगवान का राज
वैसे तो यह चराचर जगत् भगवान के अधीन है और वे ही इस सम्पूर्ण पृथ्वी पर शासन करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा समय भी आता है जब इस सम्पूर्ण जगत् पर भगवान का शासन नहीं रहता। पौराणिक कथा के अनुसार धनत्रयोदशी से लेकर अमावस्या (दीपावली) तक तीन दिन सम्पूर्ण पृथ्वी पर भगवान का शासन नहीं रहता है।
दैत्यराज बलि को दिए अपने वरदान के कारण भगवान स्वयं तीन दिन के लिए इस संसार से अपने शासन का त्याग करते हैं। धनत्रयोदशी से अमावस्या अर्थात् दीपावली तक इस समस्त संसार में दैत्यराज बलि का शासन रहता है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति दैत्यराज बलि के शासन में दीपमाला प्रज्जवलित करता है उसके यहां स्थाई लक्ष्मी का वास होता है।
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
लेखक के बारे में
पं. हेमन्त रिछारिया
ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया ज्योतिष प्रभाकर उपाधि से सम्मानित हैं। विगत 12 वर्षों से ज्योतिष संबंधी अनुसंधान एवं ज्योतिष से जुड़ी गलत धारणाओं का खंडन कर वास्तविक ज्योतिष के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। कई ज्योतिष आधारित पुस्तकों का लेखन।....
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