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Written By WD Feature Desk
Last Updated : गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026 (10:02 IST)

Vinayak Damodar Savarkar: वीर सावरकर की क्या है कहानी, जानें उनका योगदान

वीर सावरकर का चित्र
Veer Savarkar Punyatithi 2026: वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी, लेखक और विचारक थे। वे भारतीय इतिहास में एक अत्यंत विवादास्पद, लेकिन प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में प्रसिद्ध हैं। सावरकर का जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, समाज सुधार, और हिंदू राष्ट्रवाद की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने अपने विचारों, लेखन, और संघर्ष के माध्यम से भारतीय समाज और राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला। उनकी पुण्यतिथि और बलिदान दिवस पर हर साल श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।ALSO READ: Gadge Maharaj Jayanti: सामाजिक क्रांति के अग्रदूत संत गाडगे महाराज की जयंती, जानें 8 खास बातें
 
  1. वीर सावरकर का जीवन परिचय
  2. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
  3. '1857 की क्रांति' पर पुस्तक
  4. 'हिंदुत्व' की अवधारणा
  5. सेलुलर जेल में जीवन
  6. सावरकर और गांधीजी के विचारों में अंतर
  7. राजनीतिक संघर्ष और जेल से रिहाई
  8. सावरकर की आलोचना और विवाद
  9. वीर सावरकर का निधन
 

आइए यहां जानें वीर सावरकर के प्रमुख योगदान

 

वीर सावरकर का जीवन परिचय

* जन्म: 28 मई 1883, नाना गांव, जिला रत्नागिरी, महाराष्ट्र
* माता-पिता: श्री दामोदर पंत सावरकर और राधाबाई सावरकर
* शिक्षा: उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रत्नागिरी में प्राप्त की और फिर पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज में अध्ययन किया। इसके बाद, सावरकर ने इंग्लैंड में ग्रेट ब्रिटेन के लंदन विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई की।
 

1. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक साहसी और प्रतिबद्ध क्रांतिकारी थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के माध्यम से ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष किया।
 
* सावरकर का प्रमुख क्रांतिकारी कार्य 'अंडमान सेलुलर जेल' से जुड़ा है, इस जेल को काला पानी के नाम से भी जाना जाता है। जहां उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र क्रांति की योजना बनाई और इसके लिए कई अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर संघर्ष किया।
 
* उनका प्रसिद्ध क्रांतिकारी काम 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' से जुड़ा था, जो बाद में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन में बदल गया।
 

2. '1857 की क्रांति' पर पुस्तक

वीर सावरकर ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पहली बड़ी क्रांति, 1857 के विद्रोह को बहुत महत्वपूर्ण माना। उन्होंने इस विद्रोह को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई के रूप में प्रस्तुत किया। उनकी पुस्तक 'The History of the First War of Indian Independence' (1909) में उन्होंने 1857 के संघर्ष को ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ एक संगठित प्रयास के रूप में देखा और इसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत माना।
 

3. 'हिंदुत्व' की अवधारणा

सावरकर का सबसे बड़ा योगदान हिंदुत्व की अवधारणा को स्पष्ट करना था। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'हिंदुत्व: Who is a Hindu?' (1923) में हिंदुत्व को एक सामाजिक और राजनीतिक विचारधारा के रूप में पेश किया। सावरकर के अनुसार, हिंदुत्व सिर्फ एक धर्म नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान थी, जो भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाले सभी हिंदुओं को एकजुट करती थी।
 
* उन्होंने हिंदू समाज को अपनी एकता और शक्ति को पहचानने का आह्वान किया और भारतीय राष्ट्रीयता को हिंदू विचारों के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनका मानना था कि हिंदू संस्कृति और सभ्यता को बचाने के लिए ब्रिटिश साम्राज्य को हराना जरूरी था।
 

4. सेलुलर जेल में जीवन

वीर सावरकर ने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया था और उन्हें अंडमान के 'सेलुलर जेल' में आजीवन कारावास की सजा दी गई। वहां उन्होंने अपने कड़ी यातनाओं का सामना किया, लेकिन इस कठिन समय में भी उन्होंने अपने मानसिक साहस और देशभक्ति को कायम रखा। उनकी जेल यात्रा को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रेरक कथा माना जाता है।

 

5. सावरकर और गांधीजी के विचारों में अंतर

सावरकर ने हमेशा अपने दृष्टिकोण में गांधीजी से भिन्न विचार प्रस्तुत किए। गांधीजी ने आहिंसा (non-violence) को अपनी स्वतंत्रता संग्राम की प्राथमिकता माना, जबकि सावरकर ने सशस्त्र क्रांति (armed resistance) को स्वतंत्रता प्राप्ति का प्रमुख मार्ग माना। उनका मानना था कि केवल अहिंसा से ब्रिटिश साम्राज्य को समाप्त नहीं किया जा सकता था, इसके लिए बलिदान और संघर्ष की आवश्यकता थी।
 

6. राजनीतिक संघर्ष और जेल से रिहाई

वीर सावरकर का जीवन राजनीतिक संघर्ष से भरा रहा। उन्हें एक लंबी अवधि के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा कैद किया गया, लेकिन उनके प्रयासों से वे 1924 में रिहा हो गए। हालांकि, उनका नाम हमेशा भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ आवाज उठाने वाले संघर्षकर्ताओं में लिया जाता है।
 

7. सावरकर की आलोचना और विवाद

वीर सावरकर के विचारों को लेकर आलोचनाएं भी हुईं। उनकी हिंदुत्व विचारधारा और ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष के तरीके को कुछ लोग अत्यधिक कठोर और विभाजनकारी मानते थे। उनके कुछ विचारों को समकालीन राजनीति में भी विवादास्पद माना जाता है, खासकर उनके हिंदू राष्ट्रवाद के दृष्टिकोण को लेकर। वे महात्मा गांधी की हत्या के मामले में भी विवाद में घिरे थे, हालांकि अदालत ने उन्हें इस मामले में दोषी नहीं ठहराया और सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया था। 

 

8. वीर सावरकर का दृष्टिकोण और योगदान

वीर सावरकर का जीवन और कार्य आज भी भारतीय राजनीति, समाज, और संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उनके योगदान को एक ओर जहां स्वतंत्रता संग्राम के महानायक के रूप में याद किया जाता है, वहीं उनकी विचारधारा पर बहस भी जारी रहती है। उनका आदर्श और उनके सिद्धांत आज भी भारतीय समाज को एक सशक्त, समृद्ध और संघर्षशील राष्ट्र की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं।
 

9. वीर सावरकर का निधन

विनायक दामोदर सावरकर का मानना था कि जब जीवन का उद्देश्य पूरा हो जाए, तो शरीर को त्याग देना चाहिए। उन्होंने 'आत्मार्पण' (उपवास के जरिए देह त्याग) का निर्णय लिया और 26 फरवरी 1966 को उनका निधन हुआ था।
 
सावरकर का जीवन यह सिखाता है कि देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान और संघर्ष की आवश्यकता होती है। उनके दृष्टिकोण ने भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ दिया, और उनके योगदान को भारतीय इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा।
 
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