ग्वादर पर गदर, मोदी का दोहरे मोर्चे पर लड़ाई का इरादा

Last Updated: सोमवार, 22 अगस्त 2016 (14:51 IST)
चाबहार से किनारे लग जाएगा पाकिस्तान? : भारत जब भी किसी पड़ोसी देश या क्षेत्रीय ताकत से दोस्तना संबंध बनाता है या रणनीतिक सहयोग करता है, तो यह पाकिस्तान को प्रभावित करता है। भारत और पाकिस्तान इस क्षेत्र में मजबूत प्रतिद्वंद्वी हैं। भारत और ईरान के लिए चाबहार परियोजना का बहुत महत्व है। उधर पाकिस्तान को लगता है कि अगर यह परियोजना सफल हुई तो वह अलग-थलग पड़ सकता है।
 
इसकी कई वजहें हैं। पहली वजह यह है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद इस ईरानी बंदरगाह के जरिए भारत को अफगानिस्तान तक सामान पहुंचाने का सीधा रास्ता मिलेगा। अब तक भारतीय चीजें पाकिस्तान के जरिए अफगानिस्तान तक पहुंचती हैं। इसी परियोजना के जरिए भारत सेंट्रल एशिया और पूर्वी यूरोप तक अपना सामान भेज सकता है।
 
ऐसे में यह पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा रणनीतिक नुकसान साबित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटने के बाद बन रहे नए ईरान से हुआ यह समझौता एक बुनियाद है। पाकिस्तान के लिए खतरा यह है कि व्यापार में भारत-ईरान-अफगानिस्तान का सहयोग, रणनीति और अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ेगा और इसके पाकिस्तान के लिए नकारात्मक नतीजे निकलेंगे।
 
जैसे कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत-ईरान मानते रहे हैं कि उस इलाक़े में जो कुछ भी हो रहा है, उसमें आईसआईएस की भूमिका रहती है। ऐसे में भारत और उसके नए महत्वपूर्ण सहयोगी साथ मिलकर इन मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा सकते हैं। तीसरी वजह यह है कि भारत जब ऐसी चाल चलता है तो पाकिस्तान, ओआईसी या फिर अरब जगत के जरिए उसे अलग-थलग करने की कोशिश करता है। 
 
ईरान जैसी सांस्कृतिक, राजनीतिक, रणनीतिक और आर्थिक शक्ति के साथ भारत के अच्छे संबंध पाकिस्तान को कैसे भा सकते हैं ? पाकिस्तान इस्लामिक जगत में खुद को बड़ी ताकत के रूप में पेश करना चाहता है। परमाणु शक्ति बनने के बाद वह इस मकसद में कुछ हद तक कामयाब भी रहा है। ईरान उस लिहाज से उसका प्रतिद्वंद्वी भी है। अब भारत यदि पूरी तरह ईरान के साथ हो ले तो स्वाभाविक है कि यह पाकिस्तान के लिए बुरी खबर सिद्ध होगी।
 
चाबहार परियोजना भारत के लिए एक रणनीतिक कारक है। चीन-पाकिस्तान के आर्थिक संबंधों को देखते हुए भारत-ईरान की चाहबार परियोजना को पाकिस्तान बड़े रणनीतिक कदम की तरह देखेगा और कभी पसंद नहीं करेगा। ग्वादर परियोजना में जैसी चीन की भूमिका है, वैसी ही भूमिका आर्थिक परिप्रेक्ष्य में भारत की भी है। भारत ने चाबहार में करीब 10 करोड़ डॉलर का निवेश किया है और मोदी जी ने 50 करोड़ डॉलर के और निवेश का वादा किया है। पाकिस्तान को लग रहा था कि उसने ग्वादर परियोजना से रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है, लेकिन चाबहर पर हुए समझौते से पाकिस्तान को झटका लगा है।
 
अगले पन्ने पर के खनिजों के खजाने की पाकिस्तानी और चीनी लूट...
 



और भी पढ़ें :