नक्सलियों का खतरनाक एजेंडा, 2050 तक लोकतंत्र का खात्मा...

दुनिया के एकमात्र हिन्दू राष्ट्र नेपाल (अब नहीं) को भी नहीं भूलना चाहिए, जहां नक्सली आंदोलन किस तरह फलाफूला और अन्तत: उसने वहां की सरकार को उखाड़ फेंका। आज नेपाल पर माओवादियों का कब्जा है, जो चीन के इशारे पर भारत विरोधी गतिविधियों में भी संलग्न हैं।
इन दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि माओवादी एक दीर्घकालीन रणनीति के तहत काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य 2013-14 में सरकार गिराने का नहीं है, वे सोची-समझी रणनीति के तहत 2050 या कुछ दस्तावेजों के अनुसार 2060 में तख्ता पलट की योजना पर काम कर रहे हैं।

क्या सरकारें सबक लेंगी? : बढ़ती नक्सली हिंसा से केन्द्र और राज्य सरकारों ने कोई सबक लिया हो, ऐसा दिखाई नहीं देता। छत्तीसगढ़ का ताजा हमला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। बजाय इसके कि इस नरसंहार का कड़ा जवाब दिया जाता केन्द्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस और राज्य की भाजपा सरकार के नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप मढ़ना शुरू कर दिया है। ऐसे में यह कहने का कोई अर्थ नहीं रह जाता कि सरकारें इससे कोई सबक लेंगी।

संदीपसिंह सिसोदिया|
सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी द्वारा जारी इन दस्तावेजों में माओवादियों की 'जनक्रांति' की के लिए रणनीति-युद्धनीति का एकमात्र लक्ष्य 2050 तक भारत सरकार उखाड़ फेंकना और भारत में लोकतंत्र का सफाया है। भारत में जनसेना का निर्माण कर सरकारी सेना से युद्ध की तैयारी कर रहे माओवादी स्पष्ट रूप से चीन के कम्युनिस्ट नेता माओत्से तुंग से प्रेरित है।
हमें दुनिया के एकमात्र हिन्दू राष्ट्र नेपाल (अब नहीं) को भी नहीं भूलना चाहिए, जहां नक्सली आंदोलन किस तरह फलाफूला और अन्तत: उसने वहां की सरकार को उखाड़ फेंका। आज नेपाल पर माओवादियों का कब्जा है, जो चीन के इशारे पर ारत विरोधी गतिविधियों में भी संलग्न हैं। यदि भारत ने इससे कोई सबक नहीं लिया तो कोई आश्चर्य नहीं कि नेपाल को भारत में दोहराया जाए।



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