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  4. Posing as a fake doctor, he forced people to sell their kidneys in Cambodia.
Last Updated : बुधवार, 24 दिसंबर 2025 (13:48 IST)

फर्जी डॉक्‍टर बन कंबोडिया में बिकवाता था मजबूर लोगों की किडनी, सोशल मीडिया पर करता था शिकार

हर किडनी पर 1 लाख कमीशन, इतनी किडनी बेच चुका है फर्जी डॉ कृष्णा

Kidney Racket
गरीब, कर्ज में डूबे जरूरतमंद और मजबूर लोगों को सोशल मीडिया पर फंसाकर किडनी बेचने का एक बेहद संगीन मामला सामने आया है। इसमें एक फर्जी डॉक्‍टर भी शामिल है। हर किडनी पर एक लाख रुपए कमिशन का काला खेल चल रहा था। मामला सामने आने के बाद अब इसमें नए नए खुलासे हो रहे हैं। यह गिरोह भारत के कई राज्यों में सक्रिय था। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और अब महाराष्ट्र में चंद्रपुर, नाशिक और सोलापुर का कनेक्शन भी सामने आ गया है।

क्‍या है कंबोडिया कनेक्‍शन : दरअसल, महाराष्ट्र के चंद्रपुर से शुरू हुआ कंबोडिया किडनी रैकेट पांच राज्यों तक फैला हुआ है। कृष्णा एक इंजीनियर था जिसने कपड़ों के व्यापार में घाटे के बाद फर्जी डॉक्टर बनकर किडनी तस्करी की शुरुआत की। पुलिस जांच में पता चला कि कृष्णा ने अब तक लगभग 12 लोगों की किडनी कंबोडिया के अस्पताल में बिकवाई।

बता दें कि कृष्णा उर्फ मल्लेश सोलापुर में फर्जी नाम से रह रहा था। गिरफ्तारी के बाद पता चला कि वह सोलापुर में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। स्थानीय लोगों को खुद को वो 'डॉ. कृष्णा' बताता था। जबकि उसका असली नाम रामकृष्ण मल्लेश सुंचू है।

क्‍या है पूरा कांड : इस पूरे नेटवर्क का मुख्य एजेंट कृष्णा उर्फ रामकृष्ण मल्लेश सुंचू आखिरकार सोलापुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि मूल रूप से एक इंजीनियर रहा कृष्णा अपनी पहचान छुपाकर फर्जी डॉक्टर बन गया था और विदेश में अवैध किडनी बिक्री का बड़ा एजेंट बन चुका था। हर किडनी के सौदे पर कृष्णा को 1 लाख रुपए का कमीशन मिलता था।

कैसे इंजीनियर से बना किडनी तस्कर : इस पूरे कांड का आरोपी कृष्णा असल में इंजीनियर है। कपड़ों के व्यापार में भारी घाटा होने के बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत में उसने खुद अपनी किडनी बेची, फिर उसे नेटवर्क मिल गया और वह लोगों को बहका कर किडनी बिकवाने लगा। हर किडनी के सौदे पर कृष्णा को 1 लाख रुपए का कमीशन मिलता था।

12 लोगों की किडनी बेच चुका है: पुलिस जांच में पता चला है कि कृष्णा के जरिए लगभग 12 लोग कंबोडिया के ‘प्रेआ केत मेलीआ हॉस्पिटल' (मिलिट्री हॉस्पिटल), फ्नॉम पेन्ह में अपनी किडनी बेच चुके हैं। कृष्णा जरूरतमंद, गरीब और कर्ज में डूबे लोगों को सोशल मीडिया (खासकर फेसबुक) के जरिए फंसाता था। हालांकि अभी नए रहस्‍य उजागर हो रहे हैं।

चंद्रपुर के किसान रोशन कुडे ने भारी कर्ज से तंग आकर किडनी बेचने का रास्ता चुना। वह फेसबुक के जरिए कृष्णा के संपर्क में आया। कृष्णा उसे 8 लाख रुपए देने का लालच दिया। दोनों की पहली मुलाकात कोलकाता में हुई, जहां मेडिकल टेस्ट कराया गया। इसके बाद रोशन को कंबोडिया भेजा गया, जहां उसकी किडनी निकाल ली गई। रोशन के मुताबिक उसने 2021 में दो साहूकारों से 50 हाजर उधार लिए थे, जिनकी वसूली ब्याज सहित बढ़कर 74 लाख बताई गई।

5 राज्यों में फैला रैकेट: यह गिरोह भारत के कई राज्यों में सक्रिय था। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और अब महाराष्ट्र में चंद्रपुर, नाशिक और सोलापुर का कनेक्शन भी सामने आया है।
Edited By: Navin Rangiyal
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