सम्बंधित जानकारी
- COVID-19 : दुनियाभर में 13.51 करोड़ से अधिक लोग Corona से संक्रमित, 29.26 लाख से ज्यादा की मौत
- दिल्ली में कोरोना की चौथी लहर बेहद खतरनाक, 65% मरीज 35 साल से कम उम्र के
- Positive story: 106 साल की कमली बाई ने वैक्सीन लगाकर कर दिया कमाल!
- कोरोनावायरस का कहर, 46 दिन में बढ़े 9,72,161 एक्टिव मरीज, 6 माह बाद 839 मरीजों की मौत
- Covid-19 India Update : देश में कोरोना के 1.52 लाख नए मामले, 61,456 एक्टिव मरीज भी बढ़े
बड़ी खबर, चीन का कोरोना वैक्सीन कम असरदार
बीजिंग। चीन के शीर्ष रोग नियंत्रण अधिकारी ने कहा है कि देश के कोरोना वायरस संक्रमण रोधी टीके कम असरदार हैं और सरकार इन्हें असरदार बनाने पर विचार कर रही है।
चीन के रोग नियंत्रण केन्द्र के निदेशक गाओ फू ने चेंगदू शहर में एक संगोष्ठी में कहा कि चीन के टीकों में बचाव दर बहुत ज्यादा नहीं है। गाओ का यह बयान ऐसे वक्त में सामने आया है जब बीजिंग ने अन्य देशों को टीकों की करोड़ों खुराके दी हैं और पश्चिमी देशों के टीकों के प्रभावी होने पर संशय पैदा करने और बढ़ावा देने की भी वह लगातार कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि अब इस बात पर गंभीरता से विचार हो रहा है कि क्या हमें टीकाकरण प्रक्रिया के लिए अलग-अलग टीकों का इस्तेमाल करना चाहिए।
ब्राजील के शोधकर्ताओं ने चीन की टीका निर्माता कंपनी सिनोवैक के संक्रमण रोधी टीकों के असरदार होने की दर लक्षण वाले संक्रमण से बचाव में 50.4 प्रतिशत पाई। वहीं इसके मुकाबले फाइजर द्वारा बनाए गए टीके 97 प्रतिशत असरदार पाए गए। गौरतलब है कि चीन ने अपने देश में किसी अन्य देश के टीके के इस्तेमाल को अभी मंजूरी नहीं दी है।
गाओ ने टीके के संबंध में रणनीति पर किसी तरह के बदलाव के ब्योरे तो नहीं दिए लेकिन उन्होंने एमआरएनए का जिक्र किया। यह प्रयोग की एक तकनीक है जिसका इस्तेमाल पश्चिम देशों के टीका निर्माता करते हैं, वहीं चीन के दवा निर्माता पारंपरिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को उन लाभ के बारे में विचार करना चाहिए, जो एमआरएनए टीके मानव जाति को पहुंचा सकते हैं। हमें सावधानी से उसका अनुसरण करना चाहिए और केवल इसलिए उसकी उनदेखी नहीं करनी चाहिए क्योंकि हमारे पास पहले से ही अनेक प्रकार के टीके हैं। (भाषा)
चीन के रोग नियंत्रण केन्द्र के निदेशक गाओ फू ने चेंगदू शहर में एक संगोष्ठी में कहा कि चीन के टीकों में बचाव दर बहुत ज्यादा नहीं है। गाओ का यह बयान ऐसे वक्त में सामने आया है जब बीजिंग ने अन्य देशों को टीकों की करोड़ों खुराके दी हैं और पश्चिमी देशों के टीकों के प्रभावी होने पर संशय पैदा करने और बढ़ावा देने की भी वह लगातार कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि अब इस बात पर गंभीरता से विचार हो रहा है कि क्या हमें टीकाकरण प्रक्रिया के लिए अलग-अलग टीकों का इस्तेमाल करना चाहिए।
गाओ ने टीके के संबंध में रणनीति पर किसी तरह के बदलाव के ब्योरे तो नहीं दिए लेकिन उन्होंने एमआरएनए का जिक्र किया। यह प्रयोग की एक तकनीक है जिसका इस्तेमाल पश्चिम देशों के टीका निर्माता करते हैं, वहीं चीन के दवा निर्माता पारंपरिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को उन लाभ के बारे में विचार करना चाहिए, जो एमआरएनए टीके मानव जाति को पहुंचा सकते हैं। हमें सावधानी से उसका अनुसरण करना चाहिए और केवल इसलिए उसकी उनदेखी नहीं करनी चाहिए क्योंकि हमारे पास पहले से ही अनेक प्रकार के टीके हैं। (भाषा)
