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Written By ND

जीत को करें इमेजि‍न...

एमएसन युवा
- अनुराग तागड़े

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जब हम मेहनत करते हैं और एक्‍पेक्‍टेड रि‍जल्‍ट नहीं मि‍लता तो हम सेल्‍फ एनालि‍सि‍स करते हैं। इस प्रक्रिया में हम आरंभ से अंत तक जो भी प्रयास किए हैं, उसके बारे में सोचते हैं और यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि कहाँ चूक हो गई? कौन से कारण थे, जिनके कारण सफलता दूर छिटक गई।

मेहनत सभी करते हैं, पर जिन्हें परीक्षा में या जॉब पाने में सफलता मिल जाती है, वे कुछ अलग किस्म के नहीं होते, बल्कि उनके मेहनत करने का तरीका अलग होता है। इसमें वह सबकुछ होता है, जो एक अधूरे प्रयत्नों में होता है, पर इन सभी से अलग होता है वह यह कि वे अपनी जीत या सफलता की कल्पना पहले से कर चुके रहते हैं।

वे आत्म-विश्वास से लबरेज होते हैं। साथ ही वे जानते हैं कि जीत या सफलता कैसे पाई जाए। दरअसल हमारे पास जो दिमागी शक्ति है, उसमें इतनी ताकत है कि हम उसके जरि‍ए से चाहे जैसी कल्पनाओं को आकार दे सकते हैं। जरा सोचिए कोई भी काम करने से पहले अगर हम लगातार अपनी जीत के बारे में सोचेंगे तब यह भी सोचेंगे कि अगर हारेंगे तो कैसे हारेंगे? कौन से कारण हो सकते हैं, जिनसे हार का सामना करना पड़ सकता है आदि।

इससे हमारी तैयारी में आसानी होगी और हम स्वयं ही अपने अच्छे आलोचक बन सकते हैं। अरनाल्ड श्वाजनेगर ने मिस्टर यूनिवर्स का खिताब 7 बार जीता। कोई भी सामान्य व्यक्ति एक, दो या तीन बार मिस्टर यूनिवर्स का खिताब जीत सकता था, पर 7 बार जीतना अपने आपमें अजूबा था।

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जब उनसे पूछा गया कि आपकी जीत का राज क्या है? तब उन्होंने बताया था कि रोजाना जिम में वजन उठा कर एक्सरसाइज सभी करते हैं, पर मैं प्रतिदिन जिम में अपने आपको एक विजेता की तरह आईने में देखता था और यह मेरे रोजाना के रूटिन में शामिल था।

यहीं नहीं, प्रोफेशनल गोल्फर जैक निकलस से जब यह पूछा गया था कि आपकी सफलता का क्या राज है तब उनका कहना था कि वे जब भी शॉट मारते हैं, उसके पूर्व वे इन सभी बातों की कल्पना कर लेते हैं कि बॉल को कैसे और कहाँ मारना है। उसकी उँचाई कितनी होगी। यह सबकुछ कल्पना में होने के बाद इस कल्पना को वे दिमाग में बनाए रखते हैं।

उसके बाद शॉट मारते हैं और अधिकांश समय वे सही शॉट लगाते हैं। यहीं नहीं, एक सबसे बेहतरीन उदाहरण एक युद्धबंदी का भी है। युद्ध के दौरान दुश्मन देश द्वारा पकड़े जाने के बाद उसे वर्षों तक जेल में रखा गया। इस दौरान वह अपने को दिमागी रूप से व्यस्त रखने के लिए मन ही मन गोल्फ खेला करता था, क्योंकि गोल्फ उसका पसंदीदा गेम था।

यह प्रक्रिया उसने वर्षों तक जारी रखी। जब वह जेल से छूटकर अपने देश अमेरिका पहुँचा तब उसने गोल्फ खेलने की इच्छा जताई और जब खेला तब उसने पाया कि वह पहले से कहीं अधिक अच्छा गोल्फ खेल पा रहा था।
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