अनुराधा... कहानी है एक लड़की के अनेक रूपों की, जो मां-बाप के लिए एक संस्कारवान बेटी है, तो छोटी बहन के लिए एक आदर्श, जो गांव की लाड़ली है होनहार बिटिया है, तो पति को दिलों जान से प्यार करने वाली नारी का एक रूप।
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जो ससुराल की जिम्मेदार बहू है तो दोस्ती की एक मिसाल भी, लेकिन ये समाज तमाम गुणों से भरी और रंगों से रंगी एक मासूस निर्दोष लड़की को अपने गंदे नजरिये से देखने से बाज नहीं आता और उसकी जिंदगी को जहन्नुम बना कर रख देता है।
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कैसा है ये समाज जो लोगों को जीते जी मार देता है? कौन है ये समाज? क्या हम और आप? इन्हीं बातों के इर्दगिर्द घूमती है 'अनुराधा' की कहानी।
लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें