ईरानी एक्ट्रेस मंदाना करीमी भारत छोड़ेंगी, बोलीं- अब यह देश घर जैसा नहीं लगता
अभिनेत्री मंदाना करीमी ने आखिरकार उस सवाल का जवाब दे दिया है, जो पिछले कुछ दिनों से चर्चा में था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि वह भारत छोड़ रही हैं। वजह है सुरक्षा। उन्होंने बताया कि वह अभी ज्यादा जानकारी साझा नहीं कर सकतीं, लेकिन हालात ऐसे हो गए हैं कि यहां रहना उनके लिए सुरक्षित नहीं है। मंदाना का यह बयान चौंकाने वाला जरूर है, लेकिन उनके हालिया तेवर और बयानबाज़ी को देखें तो यह फैसला अचानक नहीं लगता।
ईरान को लेकर खुलकर बोलीं, बढ़ी मुश्किलें
मंदाना करीमी कभी भी अपने विचारों को छिपाने वालों में नहीं रही हैं। खासकर ईरान की राजनीति और वहां की सत्ता के खिलाफ वह लगातार मुखर रही हैं। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार की खुलकर आलोचना की है। वह सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर ईरान की वास्तविक स्थिति पर बात करती रही हैं।
उनका कहना है कि भारत में रहते हुए उन्होंने ईरान के लोगों का समर्थन किया, अधिकारियों को खुलकर चुनौती दी और कभी पीछे नहीं हटीं। लेकिन इस खुलकर बोलने की कीमत उन्हें चुकानी पड़ी। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलीं, तो उनका जवाब सिर्फ एक शब्द था “हमेशा।”
“अब घर जैसा महसूस नहीं होता”
सबसे भावुक पल तब आया जब उनसे पूछा गया कि क्या इस मुश्किल समय में उन्हें किसी का साथ मिला। उनका जवाब बेहद सीधा और सख्त था—“नहीं। किसी का भी नहीं। न दोस्तों का, न सरकार का, न मीडिया का।”
मंदाना ने कहा कि लगातार संघर्ष और अकेलेपन ने उन्हें भीतर तक थका दिया है। अब भारत उन्हें घर जैसा महसूस नहीं होता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो कुछ उन्होंने किया, वह ईरान, जावेद शाह और अपने लोगों के नाम पर किया। अगर दोबारा मौका मिला, तो बिना किसी समर्थन के भी वह वही करेंगी।
ईरान के लिए लड़ाई जारी रहेगी
भारत छोड़ने का फैसला लेने के बावजूद मंदाना ने साफ कर दिया है कि उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता खत्म नहीं हुई है। उन्होंने एक मजबूत संदेश देते हुए कहा कि इस बार ईरान में आंदोलन बिना नेतृत्व के नहीं है।
उनके अनुसार “जावेद शाह” के नारे विदेशों में नहीं, बल्कि ईरान की सड़कों, विश्वविद्यालयों और सभाओं में गूंजे हैं, जहां लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। उन्होंने रज़ा पहलवी का नाम लेते हुए कहा कि अब लोग संगठित हैं, तैयार हैं और बदलाव के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उनके शब्दों में साफ झलकता है कि भारत छोड़ना एक मजबूरी हो सकती है, लेकिन उनके विचार और ईरान के लोगों के प्रति समर्थन में कोई कमी नहीं आई है।
मंदाना करीमी का यह फैसला सिर्फ एक निजी निर्णय नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह होगा कि भारत छोड़ने के बाद उनका अगला कदम क्या होगा, लेकिन इतना तय है कि उनकी आवाज़ अभी खामोश नहीं होने वाली।