बदनाम हुए तो क्या? नाम तो हुआ
गिरीश पांडेय | मंगलवार,मार्च 10,2026
देश भर के गधे खुश हैं। उनका कहना है कि बदनाम तो बहुत हुए, पर चलो अब नाम तो हो रहा है। नेता और सरकार तो कम से कम हमारे ...
टी-20 मैच की तरह बेखौफ खेलें ज़िंदगी की दूसरी पारी
गिरीश पांडेय | सोमवार,मार्च 9,2026
60 वर्ष की उम्र के बाद की जिंदगी की पारी को T-20 मैच की तरह बेखौफ खेलें। हर गेंद को बाउंड्री के बाहर भेजने का प्रयास ...
जमाने का सबसे बड़ा रोग!
गिरीश पांडेय | मंगलवार,मार्च 3,2026
कथनी, सोच और करनी में फर्क — यही इस दौर में देश-दुनिया का सबसे बड़ा रोग है। यह रोग दिखता नहीं, पर है बेहद संक्रामक। ...
मिसाल है माननीयों की दूरदर्शिता
गिरीश पांडेय | मंगलवार,मार्च 3,2026
हमारे नेताओं की दूरदर्शिता का जवाब नहीं। सच बोलते हैं। सार्वजनिक मंचों से तो और भी सोच-समझकर। चुनाव के समय तो सच को ...
सपने में घर के चौखट से बातचीत
गिरीश पांडेय | मंगलवार,मार्च 3,2026
एक रात सपने में गांव के घर की चौखट का दीदार हुआ। वह उदास और मायूस थी—अपनों के इंतज़ार में थकी-थकी आंखें लिए। सहसा मैं ...
बाड़ा
गिरीश पांडेय | मंगलवार,मार्च 3,2026
हर महानगर की छाती पर कुछ बाड़े चिपके रहते हैं—सबसे पॉश मोहल्लों से सटे, लेकिन उनसे कोसों दूर। एक तरफ़ बहुमंजिला ...
मृत्युपूर्व चेतना के लौटने का चमत्कार
गिरीश पांडेय | बुधवार,फ़रवरी 25,2026
मृत्यु से पूर्व किसी किसी के संपूर्ण चेतना के लौट आने के बारे में कई लोगों से सुना हूं। खुद में यह दुर्लभ होता है और ...
अहिंसा की जन्नत बनता गांधी का देश
गिरीश पांडेय | बुधवार,फ़रवरी 25,2026
अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी ने हिंसा की विशद व्याख्या की है। उनके अनुसार हिंसा मन, वचन और कर्म से होती है। सवाल—क्या ...
नमक, थोड़ा ही सही पर हर जगह जरूरी
गिरीश पांडेय | शनिवार,फ़रवरी 21,2026
नमक— इसकी ज़रूरत हर जगह होती है। थोड़ा ही सही, पर यह ज़रूरी होता है। नमक और जायका भोजन में एक-दूसरे के पूरक हैं, वह भी ...
लंगोट बनाम बिकनी
गिरीश पांडेय | गुरुवार,फ़रवरी 19,2026
लंगोट। कपड़े का एक छोटा सा टुकड़ा। इस छोटे से कपड़े पर मुहावरे तो कई हैं, पर लिखा कम गया है। खासकर इसकी बराबरी करने ...

