मार्मिक कविता : लाशों का मौन
शिवेन्द्र प्रताप सिंह | शनिवार,मई 15,2021
ये तो लाशें हैं साब, ये प्रश्न कहां करती हैं, अगर ये बिलखते बच्चे होते, तो अपने मर चुके मां-बाप का पता पूछते,
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