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गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद
Gupt Navratri Mantra: गुप्त नवरात्रि का समय तंत्र-मंत्र, साधना और सोई हुई आध्यात्मिक शक्तियों को जगाने के लिए सबसे अचूक माना जाता है। सामान्य नवरात्रि के मुकाबले गुप्त नवरात्रि में की गई साधना अधिक तीव्र फल देती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंत्रों का प्रभाव श्रद्धा, नियम और शुद्ध आचरण के साथ किए गए जप पर आधारित माना जाता है।
गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें
Gundicha Temple: भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय पड़ाव गुंडिचा मंदिर ही है। प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पुरी में श्री जगन्नाथ प्रभु की रथयात्रा निकाली जाती है। यह रथ मुख्य मंदिर से निकलकर 3 किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर जाता है और वहीं 9 दिनों तक रहने के बाद देवशयनी एकादशी के दिन लौट आता है। धार्मिक, पौराणिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह पड़ाव क्यों इतना खास है, आइए इसकी 5 सबसे महत्वपूर्ण बातें समझते हैं।
भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा
16 से 26 जुलाई तक जगन्नाथ रथयात्रा का उत्सव रहेगा। पौराणिक मान्यताओं और जगन्नाथ संस्कृति के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की मौसी देवी अर्धसिनी हैं, जिन्हें श्रद्धा से 'मौसी मां' कहा जाता है। भगवान जगन्नाथ की मौसी और उनसे जुड़ी परंपराओं के बारे में कुछ बेहद खास बातें।
गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की सही व्याख्या क्या है? मौलाना जरजिस अंसारी के दावे की पड़ताल
उत्तर प्रदेश के मौलाना जरजिस अंसारी ने एक विवादित बयान देते हुए भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम बताता है। उन्होंने दावा किया कि श्रीकृष्ण 5 वक्त की नमाज पढ़ते थे। इस दौरान मौलाना जरजिस अंसारी ने अपनी तकरीर के दौरान श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6 के श्लोक 10 का 'गलत अर्थ' निकालकर अपनी बात को साबित करने की कोशिश भी की।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास: कब, कैसे और क्यों हुई शुरुआत?
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास जितना गौरवशाली है, उतना ही रहस्यों और संघर्षों से भरा है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता और अटूट आस्था की जीती-जागती कहानी है। हजारों वर्षों से यह रथयात्रा जारी है। आइए इसके प्रारंभ से लेकर इतिहास की मुख्य घटनाओं को संक्षिप्त में जानते हैं।
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धर्म संसार
देवशयनी एकादशी 2026: कब है शुभ मुहूर्त? जानें चातुर्मास की शुरुआत और भगवान विष्णु को शयन कराने की सही विधि
सनातन परंपरा में एकादशी तिथि का स्थान सबसे पावन माना गया है। हर महीने के दोनों पक्षों (शुक्ल और कृष्ण) में आने वाली यह ग्यारहवीं तिथि साक्षात जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है।
सूर्य का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश: शनि के नक्षत्र में गोचर से इन 4 राशियों पर मंडरा सकता है संकट
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राशि परिवर्तन के साथ-साथ उनका नक्षत्र परिवर्तन भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 20 जुलाई 2026 को ग्रहों के राजा सूर्य देव ने पुनर्वसु नक्षत्र से निकलकर पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर लिया है। पुष्य नक्षत्र को सभी 27 नक्षत्रों का राजा माना जाता है और इसके स्वामी न्याय के देवता शनि देव हैं।
Parvati Jayanti 2026: पार्वती जयंती, जानिए क्या है इस दिन का महत्व और कथा
Goddess Parvati Worship: पार्वती जयंती सनातन धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह दिन भगवान भोलेनाथ की अर्धांगिनी माता पार्वती शक्ति के जन्मोत्सव के रूप में पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 21 जुलाई 2026, दिन मंगलवार को मनाया जा रहा है। इसलिए इस दिन उनकी आराधना करने से साहस, धैर्य, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
देवशयनी एकादशी कब है, क्या करते हैं इस दिन, जानिए महत्व
Devshayani Ekadashi:हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी को वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक माना जाता है। यह तिथि भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होती है और धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है...
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की सातवीं देवी मां धूमावती, जानिए पूजा विधि
Maa Dhumavati Puja Vidhi: इस दौरान साधक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के साथ-साथ दस महाविद्याओं की पूजा भी करते हैं। गुप्त नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर सातवीं महाविद्या मां धूमावती की आराधना का विधान है। मां धूमावती को वैराग्य, तप, त्याग, संकट निवारण और शत्रु बाधा से मुक्ति प्रदान करने वाली देवी माना जाता है।
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