क्या आपको पता है कि आपकी राशि का कौनसा ग्रह, नक्षत्र और वार है?

Rashi
किस राशि का कौनसा होता है और कौनसा और होता है। साथ ही वह ग्रह उस राशि में कितने समय भ्रमण करता है। यह इसलिए जानना चाहिए ताकि इससे उसके प्रभाव को भी जाना जा सके तो आजो जानते हैं संक्षिप्त में जानकारी।

मेष और वृश्चिक : इस राशि का ग्रह मंगल है और मृगशिरा, चित्रा, घनिष्ठा इसके नक्षत्र है। मंगल मकर में उच्च का और कर्क में नीच का होता है। इसकी दिशा दक्षिण और वार मंगलवार है। प्रत्येक राशि में एक माह भ्रमण करता है।

कन्या और मिथुन : इस राशि का ग्रह बुध है और अश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती इसके नक्षत्र है। बुध कन्या में उच्च, मीन में नीच का होता है। इस की दिशा पूर्व और वार बुधवार है। 25 दिन में यह एक राशि में भ्रमण काल पूर्ण करता है।

धनु और मीन : इस राशि के स्वामी बृहस्पतिवार ग्रह हैं और पूर्वा विशाखा, पूर्वा भाद्रपद इसके नक्षत्र हैं।
गुरु कर्क में उच्च, मकर में नीच का होता है। ईशान कोण इसकी दिशा और वार गुरुवार है। एक राशि में 13 माह रहता है।

वृषभ और तुला : इस राशि के स्वामी शुक्र ग्रह और नक्षत्र भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा है। कन्या में नीच और मीन में उच्च के होते हैं। वार शुक्रवार और दिशा दक्षिण-पूर्व दिशा आग्नेय। एक राशि में एक माह भ्रमण काल।

मकर और कुंभ : इस राशि के स्वामी शनि ग्रह हैं और नक्षत्र पुष्य और अनुराधा है। तुला में उच्च का और मेष में नीच का माना गया है। वायव इनकी दिशा और शनिवार इनकार वार है। प्रत्येक राशि में अढ़ाई वर्ष भ्रमण करते हैं।
सिंह राशि : इस राशि का ग्रह सूर्य और नक्षत्र कृतिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा है। मेष में उच्च और तुला में नीच के माने गए हैं। पूर्व दिशा और वार रविवार है। प्रत्येक राशि में 30 दिन का भ्रमण काल।

कर्क राशि : इस राशि के स्वामी चंद्र ग्रह और नक्षत्र रोहिणी, हस्त, श्रवण है। वृषभ में उच्च, वृश्चिक में नीच के होते हैं। वायव दिशा और सोमवार इनका वार है। एक राशि में लगभग ढाई दिन भ्रमण करते हैं।

कन्या व मिथुन राशि : राहु की अपनी कोई राशि नहीं है, यह जिस ग्रह के साथ बैठता है उसी राशि को मान लिया जाता है। परंतु मतांतर से कन्या मिथुन भाव में यह माना जाता है। इसका नक्षत्र आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा है। दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैऋत्य दिशा और वार अज्ञात माता जाता है। राहु मिथुन मतांतर से, वृषभ में उच्च का धनु मतांतर से वृश्चिक में नीच का होता है। नारायण भट्ट अनुसार मिथुन राशि में उच्च तथा धनु राशि में नीच होता है। एक राशि में 18 माह भ्रमण काल।
धनु राशि : राहु के विपरित यह धनु राशि या नौवें भाव में माना गया है। नक्षत्र अश्विनी, मघा और मूल है। इसकी वायव्य दिशा और वार अज्ञात है। केतु धनु मतांतर से वृश्चिक में उच्च का, मिथुन मतांतर से वृषभ में नीच का होता है। इसका भ्रमण काल एक राशि में 18 माह है।



और भी पढ़ें :