मंगलवार, 16 अप्रैल 2024
  • Webdunia Deals
  1. धर्म-संसार
  2. ज्योतिष
  3. ज्योतिष आलेख
  4. pitra dosh upay 2024
Written By WD Feature Desk

पितृदोष से मुक्ति का सबसे बड़ा दिन माघ पूर्णिमा, मात्र एक उपाय करें

पितृदोष से मुक्ति का सबसे बड़ा दिन माघ पूर्णिमा, मात्र एक उपाय करें - pitra dosh upay 2024
HIGHLIGHTS
 
• माघ पूर्णिमा के दिन स्वयं श्रीहरि विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। 
• माघ पूर्णिमा पर गंगा स्नान से विष्णु की कृपा मिलती है। 
• यह दिन पितृदोष से मुक्ति के लिए सबसे खास माना गया है। 
 
pitra dosh upay remedies : वर्ष 2024 में 24 फरवरी, दिन शनिवार को माघ मास की पूर्णिमा मनाई जा रही है। इस पूर्णिमा बहुत अधिक धार्मिक महत्व माना गया है। मान्यतानुसार इस दिन श्रीहरि नारायण विष्णु स्वयं गंगाजल में निवास करते हैं। माघ माह की पूर्णिमा तिथि को गंगा स्नान करने से जहां विष्णु जी की कृपा मिलती है, वहीं जातक को लक्ष्मी, धन, संपदा, यश, सुख, सौभाग्य और उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। अत: माघ माह की पूर्णिमा तिथि को बहुत पवित्र माना जाता है। आज के दिन पितृ दोष निवारण के लिए मात्र एक यह उपाय करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। 
 
आइए जानते हैं यहां पितृ दोष से मुक्ति का मात्र एक खास उपाय- 
 
आज का मंत्र- ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्। 
 
आज का उपाय : माघ पूर्णिमा के दिन एक लोटा सादा जल, कच्चा दूध, गंगाजल, काली तिल, सफेद आंकड़े के पुष्प, बिल्व पत्र, भांग और धतूरा आदि चढ़ा कर भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से करें। और पितृदोष से मुक्ति के लिए सूर्यदेव के अर्घ्य के पश्चात पितृओं के निमित्त नदी तट पर तर्पण कर्म करें। साथ ही पितृसूक्त, गजेंद्र मोक्ष, पितृ स्तोत्र, पितृ कवच के पाठ के पश्चात कर्पूर जलाकर आरती करें। मात्र इस एक उपाय से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है तथा सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होगी। 
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

 
ये भी पढ़ें
राजिम मेला कब, क्यों और कहां लगता है?