गुरुवार के शुभ संयोग में मनाई जा रही है निर्जला एकादशी, आज करें जल का दान

Last Updated: गुरुवार, 13 जून 2019 (12:14 IST)

महाभारत काल में इस व्रत को भीम ने किया था, इस लिए निर्जला एकादशी को भीमसेन एकादशी और पाण्डव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। इस बार निर्जला एकादशी पर गुरुवार होने से शुभ संयोग बन रहा है।

ज्योतिष विद्वानों के अनुसार यह संयोग 6 वर्ष बाद बन रहा है। इस दिन लोग निर्जल व्रत रखकर विधि-विधान से दान करते हैं। एकादशी व्रत विशेष रूप से जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु के निमित्त किया जाता है। यह व्रत जीवन में सर्व समृद्धि देने वाला और सदगति प्रदान करने वाला माना गया है। वर्ष भर में कुल 24 एकादशी आती हैं, पर निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में श्रेष्ठ माना गया है।

इस बार निर्जला एकादशी और गुरुवार का शुभ संयोग बन रहा है। गुरुवार भगवान विष्णु को सबसे ज्यादा प्रिय दिन है, इसलिए इस दिन को ही भगवान विष्णु की पूजा के लिए सबसे ज्यादा शुभ माना गया है। निर्जला एकादशी का व्रत करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।


महाभारतकाल में महर्षि वेदव्यास ने भीम को का महत्व बताया था। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। यह व्रत हमें जल संरक्षण का संदेश देता है। इस दिन जल को ग्रहण नहीं किया जाता है, प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश है कि जल को बचाया जाए, ग्रहण तब ही करें जब संग्रहण और संरक्षण कर सकते हैं। हमारी संस्कृति में जल को वरूण देवता माना गया है। भगवान शिव ने कहा है मैं स्वयं जल हूं। अत: जल की सुरक्षा के इस शुभ पर्व पर हमें भी अपनी जिम्मेदारी तय करना चाहिए।

इस व्रत में प्रातः काल स्नान आदि से निवृत होकर मन में भगवान विष्णु के निमित्त व्रत का संकल्प करें। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। संध्याकाल में व्रत का पारायण करें। अगर निर्जला एकादशी का व्रत न भी कर पाएं तो इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान अवश्य करें। इस दिन विशेष रूप से जल का दान करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है। भोजन और खाद्य पदार्थों का दान भी कर सकते हैं। निर्जला एकादशी पर व्रत करने और दान करने से जीवन में समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य, वैभव और परिवार में शांति की प्राप्ति होती है।


निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त
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इस बार निर्जला एकादशी के शुभ मुहूर्त की शुरुआत 12 जून 2019 बुधवार से होगी।


जो सुबह 6 बजकर 27 से आरंभ होगी।


तो वहीं इस एकादशी की तिथि समाप्ति 13 जून 4 बजकर 49 मिनट पर होगी।

इसके साथ ही निर्जला एकादशी पारण का समय 14 जून को 2019 को सुबह 5:27 बजे से लेकर 8:13 बजे तक रहेगा।


निर्जला एकादशी पूजा विधि-

निर्जला एकादशी व्रत के दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक पानी नहीं पिया जाता है।


इस शुभ दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से आराधना करने के साथ ही ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का मन से जाप करते रहना चाहिए।


भगवान विष्णु की पूजा में उन्हें लाल व पीले फूलों की माला चढ़ाएं, धूप, दीप, नैवेद्य, फल अर्पित करके उनकी आरती करें।

द्वादशी को सूर्योदय के बाद ही इस निर्जला एकादशी के उपवास को खोल कर भोजन ग्रहण करें।

 

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